खगड़िया, 8 अक्टूबर 2026। देशव्यापी आह्वान के तहत गुरुवार को खगड़िया में महागठबंधन के बैनर तले वोट चोरी, तानाशाही, भ्रष्टाचार, लोकतंत्र की कथित हत्या और एसआईआर में धांधली के विरोध में जोरदार प्रतिरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले का समाहरणालय चौक पर दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने “वोट चोर गद्दी छोड़ो” समेत विभिन्न नारे लगाए।
प्रतिरोध मार्च से पहले बलुवाही चौक स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण किया। इसके बाद हजारों की संख्या में कार्यकर्ता झंडे, बैनर, तख्तियां और पुतले लेकर सड़क पर उतरे। मार्च बलुवाही चौक से एमजी रोड, मेन रोड, स्टेशन रोड, राजेंद्र चौक और फ्लाईओवर होते हुए समाहरणालय चौक पहुंचा, जहां यह सभा में तब्दील हो गया।
प्रतिरोध सभा की अध्यक्षता माकपा नेता संजय कुमार ने की, जबकि संचालन राजद नेता मनोहर यादव ने किया। पुतला दहन को कांग्रेस नेता डॉ. चंदन यादव ने मुखाग्नि दी।
आंदोलन में भाकपा नेता पुनीत मुखिया, प्रभाकर सिंह, माले नेता अरुण वर्मा, सुभाष सिंह, अरुण दास, वीआईपी नेता मनोहर साहनी, आईआईपी नेता अरुण तांती, देश बचाओ अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष किरण देव यादव, राजद नेता नीरज यादव, रितेश ठाकुर, उदय यादव, सुरेंद्र महतो सहित बड़ी संख्या में महागठबंधन के नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग की।
नेताओं ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा नहीं होता, तब तक सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन जारी रहेगा।
नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार कथित तौर पर दोषियों को बचाने का काम कर रही है। वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान कथित दमन, लाठीचार्ज, वाटर कैनन के इस्तेमाल और गिरफ्तारियों की भी कड़ी निंदा की गई।
प्रदर्शनकारियों ने महिला पत्रकारों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की भी निंदा करते हुए “लाठी-गोली की सरकार नहीं चलेगी” और “गद्दी छोड़ो” जैसे नारे लगाए। महागठबंधन नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
