सुपौल :- पोषण माह के अवसर पर बुधवार को महिला एवं बाल विकास निगम के तहत संचालित जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन के अंतर्गत बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के माध्यम से बाल विकास परियोजना कार्यालय पिपरा एवं त्रिवेणीगंज में सखी वार्ता-सह-पोषण संवेदीकरण सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं को पोषण, लैंगिक समानता, बाल विवाह की रोकथाम तथा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में लैंगिक विशेषज्ञ नीतू कुमारी ने लैंगिक भेदभाव, बाल विवाह और पोषण से जुड़े विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण के लिए महिलाओं और बालिकाओं को समान अवसर मिलना जरूरी है। लैंगिक भेदभाव का सीधा असर बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास पर पड़ता है।
उन्होंने बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने लोगों से बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने और इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
पोषण के संबंध में उन्होंने बताया कि गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों तथा बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार आवश्यक है। उन्होंने पोषण संबंधी सही व्यवहार को परिवार और समुदाय तक पहुंचाने पर जोर दिया।
वहीं, जिला मिशन समन्वयक हरिनारायण कुमार ने जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सहित महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं बालिकाओं के सशक्तीकरण के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित हैं। पात्र लाभुकों तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचाकर उन्हें लाभ दिलाने में सामुदायिक सहभागिता महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि महिला एवं बालिका सशक्तीकरण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और समानता के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी जरूरी है।
इस अवसर पर वन स्टॉप सेंटर, त्रिवेणीगंज की केन्द्र प्रशासक सलोनी कुमारी ने हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए उपलब्ध सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, लैंगिक हिंसा, यौन उत्पीड़न, बाल विवाह, मानव तस्करी सहित विभिन्न प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को चिकित्सकीय सहायता, मनो-सामाजिक परामर्श, कानूनी सहायता, पुलिस सहायता तथा अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
कार्यक्रम में पिपरा एवं त्रिवेणीगंज बाल विकास परियोजना कार्यालय की महिला पर्यवेक्षिकाओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं तथा अन्य महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दौरान पोषण, लैंगिक समानता, बाल विवाह की रोकथाम और महिलाओं एवं बालिकाओं के सशक्तीकरण से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से अपने-अपने क्षेत्रों में पोषण जागरूकता, बाल विवाह रोकथाम, लैंगिक समानता तथा महिला-बालिका सशक्तीकरण का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की गई, ताकि स्वस्थ, सुरक्षित, शिक्षित एवं समानतापूर्ण समाज का निर्माण किया जा सके।
